वक्त और बदलाव की जरूरत है

वक्त और बदलाव की जरूरत है

वर्तमान में कोरोना संक्रमण के चलते देश में फैली महामारी चिंता का विषय है ।कोशिश बस इतनी ही हो कि जो विनाश हो चुका उसे स्वीकार कर लें पर भविष्य में और विनाश ना होने दें। जीवन की शुरुआत के लिए अभी और... वक्त और बदलाव की जरूरत है । हम उस अंधे मोड़ की तरफ न जाएं जहां से वापसी का कोई रास्ता ही नहीं।मेरी ये कविता इसी पर आधारित है। 

चारों तरफ अँधेरा है,
आओ एक दीप जलाये ..
आज मिलकर एक दीप जलाएँ... 
अपने भारत की पुरातन, सनातन, 
योग , जप , तप , ध्यान , 
होम , हवन की परंपरा को फिर से जीवत करें... 
सुशिक्षित बनें, स्वच्छ बनें,शुद्ध , 
सौम्य , सरल , सुन्दर , सर्वप्रिय बनें.....
खुशियों से जहाँ जगमगाए ....
आज मिलकर एक दीप जलाएँ... 
बुराई को घटायें ,चाहतों को बढ़ायें 
मैल मन के सभी हम मिटाएँ ...
आज मिलकर एक दीप जलाएँ  ।
कितने युग बीते ,विष पीते-पीते 
प्याले अमृत के अब छलकाएँ .....
आज मिलकर एक दीप जलाएँ ।
राष्ट्र भक्ति खिले, देश फूले-फले ..
कोरोना संकट मिटे भय-अँधेरे छंटे ..
 सबको शान्ति सुख मिले,दिल हों खुशियों भरे ,
चाह जीवन की सब में जगाएँ ,
भारत स्वर्ग सा सुन्दर कहलाए ...
आज मिलकर एक दीप जलाएँ!!

         
Seema Praveen Garg 
स्वरचित (मौलिक रचना)

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