वो गोल - गोल प्यारे बेसन के लड्डू

वो गोल - गोल प्यारे बेसन के लड्डू

हमारे हर एक की जिंदगी में यादों के खजाने में बहुत सारी अनगिनत यादें छुपी हुई रहती हैं। उनमें से कुछ यादें ऐसी होती हैं जो हमारी जिंदगी का खूबसूरत हिस्सा होती हैं। जिन्हें हम कभी भूल नहीं सकते। और जब वो बातें, यादें कभी हमें याद आती हैं तो वो दिल को बहुत सुकून पहुंचाती हैं। हमारे दिलों में कई साल बाद भी वो खुशियों की गर्माहट भर देती हैं। उन बातों को याद करके बहुत साल बाद भी हमारे चेहरे पर अनायास ही मुस्कान खिल जाती है।

आज मैं आप सबको मेरी जिंदगी की एक खूबसूरत याद के बारे में बता रही हूं। हम औरतें प्रेगनेंसी के टाइम में बहुत मूडी हो जाती हैं। हमें उस वक्त सब कुछ हमारे मूड के हिसाब से ही चाहिए होता है। ऐसा ही मेरे साथ हुआ दोनों बच्चों के प्रेगनेंसी टाइम में।

लेकिन ये बात जब मैं छोटी बेटी के वक्त प्रेग्नेंट थी तब की है। सरकारी जॉब होने के नाते पतिदेव की पोस्टिंग एक छोटे से गांव में थी। वहां आवश्यक सुविधाओं के अतिरिक्त ज्यादा कुछ नहीं था।

एक रात सोते हुए अचानक 1:00 बजे मेरी आंख खुल गई और बेसन के लड्डू खाने की तीव्र इच्छा मन में जागृत हो गई। प्रेग्नेंट थी तो बस किसी ओर दूसरी चीज को खाने का मन नहीं कर रहा था।

मुझे तो उस वक्त केवल बेसन के लड्डू ही चाहिए थे। सोने के लिए जैसे ही आँख बंद करने की कोशिश करती, मेरी आंखों के आगे तो वो गोल-गोल प्यारे लड्डू ही नाचते हुए दिखाई देते और आँख तुरंत खुल जाती। 

एक एक मिनट भारी लग रहा था बेसन के लड्डू के बिना। पतिदेव ओर दूसरी चीजों को खाने की मुझसे मनुहार करते रहे, पर मेरा दिल तो बेसन के लड्डू में ही  अटका था, कुछ और खाने का तो जरा भी मन नहीं था।

उस पर कमाल ये कि हम उस वक्त रेंट से एक मशहूर हलवाई के घर पर ही रह रहे थे। ऊपर के हिस्से में वो रहते ओर नीचे वाले में हम रह रहे थे। लेकिन रात को इतनी लेट उनसे कहें तो भी कैसे ? और वो मिठाइयां अपनी शॉप पर रखते थे, घर पर थोड़े न रखते थे। तो बहुत मुश्किल हो रहा था दिल को समझाना।

तभी याद आया कि बेसन तो किचन में है ही, लड्डू न सही उसे घी में भूनकर थोड़ी चीनी मिलाकर ही अपने दिल को बहलाया जाए। तो रात को 2:30 बजे फिर मैंने वैसा ही किया। थोड़ा बेसन घी में भूनकर, चीनी मिलाकर खाया और अपनी बेसन के लड्डू खाने की जिज्ञासा को पूरा किया।

और अगले दिन सुबह जल्दी ही पतिदेव ने मकान मालिक भाई साहब को रात का सब हाल बता कर शॉप जल्दी खुलवाई और हमारे लिए गोल सुंदर बेसन के लड्डू जब लेकर आए तो हमने अकेले ही उन लड्डुओं का पूरा सफाया कर डाला।

© पुष्पा श्रीवास्तव 

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