वो गूंज अब भी गूंजती है !

वो गूंज अब भी गूंजती है !

राखी घर में सबसे बड़ी बहु थी | शादी के बाद वह अपने ससुराल में सास - ससुर , देवर व ननद के साथ को चुनती है | राखी का पति, राज नौकरी के सिलसिले में बाहर पोस्टेड था पर राखी अपने ससुराल की जिम्मेवारी के चलते राज के साथ नहीं जाती | वह घर पर ही सबकी जिम्मेदारियों को निभा रही थी | ससुराल में राखी की सास बीमार रहती थी वह राखी से लड़ नहीं सकती थी पर वे कहीं न कहीं राखी के देवर व ननद को राखी के खिलाफ भड़काती हैं कभी काम के तरीके को लेकर ! तो कभी राखी के मायके को लेकर , बात छेड़ ही देती | राखी सभी बातों को नजर अंदाज कर देती है यह सोचकर कि एक दिन सब ठीक हो जायेगा सब मुझे एक न एक दिन तो अपना मान ही लेंगेंं |  यही सोचकर राखी देवर , ननद व ससुर का रोज सुबह टिफिन तैयार करती है फिर घर के बचे काम निपटाती है | 

राखी को अपनी ननद का जरा भी सहारा न था | ननद व देवर को तो बस पढ़ाई ही दिखती थी कभी जो राखी के ससुर , ननद को राखी के काम में हाथ बंटाने कह देते तो राखी की ससुमां यह कहकर बिफरती कि बच्ची को पराये घर जाना है और काम ही करना है ! यहां उसकी भाभी है काम के लिये | धीरे - धीरे यूं ही वक्त बीत रहा था राज भी बीच बीच में छुट्टियों में राखी के पास व परिवार की खैरो खबर लेने आता रहता करीब दो साल बाद राखी एक बच्चे की मां बन जाती है | बच्चे के आने के बाद राखी का काम पहले से ज्यादा बढ़ गया था तब भी उसकी मदद कोई न करता | देवर भी पढ़ाई पूरी करके नौकरी पर लग गया था और घर पर ननद की शादी की बात चल रही थी ऐसे में घर पर सास , ननद व देवर सभी राखी को सिर्फ आदेश ही देते | सहयोग की भावना किसी में भी न थी |         

राखी सभी के तानों से घबराने लगी थी यदि वह डरकर किसी काम को करती तो उसके हाथों से सामान गिरकर टूटने लगता | हड़बड़ाहट में राखी से काम बिगड़ने लगे तभी देवर ने राखी से कहा भाभी मेरे कुछ दोस्त डिनर पर घर आने वाले हैं कुछ अच्छा सा बना देना ! देखना , उनके स्वागत में कोई कमी न रह जाये | देवर की बात सुनकर राखी ने हां में हां मिला दी पर , उस दिन राखी का बेटा कुछ बीमार था वह अकेले ही बेटे को संभालती व रसोई भी संभालती है देवर के दोस्त आकर बैठ चुके थे | राखी को खाना बनाने में कुछ देर हो जाती है तभी गुस्से में देवर ने राखी से कहा :-  क्या भाभी ! काम में कितना सुटरापन दिखाती हो ? पूरी की पूरी गंवार हैं आप ? आपको पता ही नहीं कि पहले क्या काम करना है आपको ? देवर के मुंह से इतना अपमानजनक शब्द सुनकर राखी को चैन नहीं था आग लग चुकी थी उसके अंतर्मन में | तब राखी ने देवर को जवाब देते हुए कहा :- सुनिये देवर जी ! जब मैं इस घर में आई थी तब आप छोटे थे |  मैं आपसे बहुत बड़ी हूं देवर हैं आप !  देवर की तरह रहें इतना अधिकार नहीं है आपका मुझ पर ! कि आप मेरा अपमान करें | पति नहीं हैं आप मेरे,  कि जो कुछ आप मुझसे कहें मैं सहन करती रहूंगी | हर बात की सीमा होती है गंवार जैसे शब्द का चुनाव करके आपने बता दिया कि गंवार कौन है ?                                                                         

यह जो बात बात पर मेरा अपमान करते हैं न् सब समझती हूं मैं |  इतने में राखी की ननद बोल पड़ती है कि भाभीी गलती आपने की है |  ननद की बात सुनकर राखी के सब्र का बांध टूट गया था और राखी ने कहा बस करो ननदरानी ! बहुत हो गया जब आप मेरी मदद नहीं कर सकती तो मुझे अच्छा या बुरा कहने की भी जरूरत नहीं | राखी , राज को फोन पर सारी आपबीती बताती है पर राज यही कहकर राखी को बार बार समझा देता कि सब ठीक हो जायेगा एक दिन | घर की बात घर पर रहे तो ठीक रहेगा | राखी , राज की बात सुनकर समझ जाती है कि कोई नहीं है मेरा अपना वह अपने आत्मसम्मान की खातिर सारा सामान पैक करके एक बार फिर राज को फोन करती है कि नहीं रहना मुझे इस घर में जहां नारी का अपमान हो घर की लक्ष्मी का अपमान हो | आप मुझे लेने आ रहे हैं या मैं मायके चली जाऊं इतना कहकर राखी फोन रख देती है और कुछ देर बाद वह मायके चली जाती है फिर वहां से सीधा राज के पास |   

राखी की बातों से अब राज भलीभांति समझ चुका था कि राखी की कोई गलती नहीं है तब राज घरवालों से नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि मेरी पत्नी का अपमान करने का हक किसी को नहीं ! यहां राखी के जाते ही ससुराल में सारे काम अस्तव्यस्त हो जाते हैं घर किसी के संभाले नहीं संभल रहा था तब सासुमां , देवर व ननद को एहसास होता है कि घर की रौनक घर की बहु से थी सभी को अपनी अपनी गलती का एहसास हो चला था अंत में सभी राखी से माफी मांग लेते हैं राखी भी सबको अपना समझकर और रिश्ते न टूटे इसलिये सभी को माफ कर देती है पर कहीं न कहीं राखी के मन में गंवार जैसे शब्दों की गूंज अब भी गूंज रही थी | उस वक्त उसे यही एहसास होता कि कोई नहीं है मेरा अपना |                                                                                                   

धन्यवाद                                                               

 रिंकी पांडेय                                                   

What's Your Reaction?

like
4
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0