वो नर्म धूप सरीखे ऊन के गोले..

वो नर्म धूप सरीखे ऊन के गोले..

दिसंबर का महीना एक सुखद एहसास। जब मौसम थोड़ा सर्द होने के बावज़ूद भी अच्छा लगता है। सुबह-सुबह की धूप में थोड़ी देर स्नान कर लेने पर ही शरीर को ऊर्जा और शक्ति मिल जाती है। काजू, किसमिस,बादाम का मौसम, हम पहाड़ी लोगों को तो पहाड़ी दालें और पहाड़ी खाना भी बहुत अच्छा लगता है जो जाड़े के मौसम में ही खाया जाता है।

अनार, संतरे खाने का मौसम, नींबू चूख बनाने का मौसम।हां, नींबू चूख से पुरानी कोई कहानी याद आ गई। दिसंबर का महीना था। मेरी जाड़ों की छुट्टियां थी। अभी एक माह पहले मुझे डॉक्टर से खुशखबरी मिली थी कि मैं मां बनने वाली हूं। बस फिर क्या था.... एक दिन बाजार चली गई कुछ उन लेने। हालांकि बहुत अधिक स्वेटर बनाने का काम कभी नहीं किया था मैंने।

पर आज बड़ी चाहत थी अपने हाथों से छोटी-छोटी प्यारी सी स्वेटर, टोपी और मोजे बनाने की। सुबह की नर्म धूप में बैठकर नरम नरम ऊन के गोलों की वह छुअन आज भी जब याद आती है तो दिल में कुछ होने लगता है।
अमृता पांडे

#यादोंकीगर्माहट
#thepinkcomrade

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