क्यों विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है ? एड्स क्या है ?

क्यों विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है ? एड्स क्या है ?

1 दिसंबर को हर वर्ष दुनिया भर में विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है पर क्या हमारे मन में कभी यह सवाल आया कि क्यों विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है ? एड्स क्या है ? क्या यह बीमारी है ? इसका इलाज क्या है ? इसे 1दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है ? वगैरह वगैरह ....

हर साल 1दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाते हैं और हर वर्ष इसकी थीम अलग अलग होती है 2020 में इसकी थीम है एड्स / एच. आई. वी . महामारी को समाप्त करना ,लचीलापन और प्रभाव | व लोगों को जागरूक करना | एड्स एक खतरनाक बीमारी है और इसका पता बहुत समय बाद चलता है एड्स का पूरा नाम ' एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशियएंसी सिड्रोंम ' है |

एड्स / एच. आई. वी. एक जानलेवा संक्रमण से होंने वाली बीमारी है जिसे मेडिकल की भाषा में ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस यानि कि HIV के नाम से जाना जाता है और आम भाषा में इसे एड्स कहा जाता है इस बीमारी में HIV वायरस व्यक्ति के शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता पर हमला करता है और शरीर कमजोर पड़ने लगता है जिससे वह कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित होंने लगता है |

विश्व एड्स दिवस दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष HIV के प्रति लोगो को जागरूक करने के लिये मनाया जाता है | कहते हैं किसी भी बीमारी का सर्वप्रथम इलाज जागरूकता ही होती है सबसे पहले एड्स दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने की शुरूवात WHO में एड्स की जागरूकता अभियान से जुड़े जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर नाम के दो व्यक्तियों ने अगस्त 1987 में की थी | 1997 में HIV / AIDS (UNAIDS) पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इसके प्रचार प्रसार का काम सभांलते हुए विश्व एड्स अभियान के तहत संचार रोकथाम और शिक्षा पर भी काम किया जाने लगा | पहली बार विश्व एड्स दिवस 1988 में मनाया गया था और इसका सबसे बड़ा उद्देश्य लोगो में जागरूकता फैलाना ही था |                                 

सरकार और स्वास्थ्य अधिकारी ,गैर सरकारी संगठन और दुनियाभर में सभी लोग एड्स की रोकथाम व नियंत्रण पर शिक्षा के साथ इस दिन का निरीक्षण करते हैं बचाव ही इसका इलाज है व इसे जागरूकता से ही जड़ से खत्म किया जा सकता है | इस खतरनाक बीमारी के दुष्परिणाम हमें देखने को मिल ही जाते हैं जैसे जो व्यक्ति HIV से संक्रमित है उनसे भेदभाव किया जाता है जबकि लोगो को समझने की जरूरत है कि एड्स जैसी बीमारी संक्रमित व्यक्ति के साथ उठने ,बैठने व हाथ मिलाने से और उसके साथ खाना खाने से नहीं फैलती |

HIV का संक्रमण असुरक्षित यौन सबंध को बनाने से फैलता है   और संक्रमित व्यक्ति के रक्त के सम्पर्क में आने से फैलता है | कहा जाता है इस रोग का विषाणु HIV आफ्रीका के खास प्रजाति के बंदर में पाया गया था वहीं से यह पूरी दुनिया में फैला | अब यदि एड्स के उपचार की बात की जाये तो इस बीमारी का सबसे बड़ा इलाज लोगों में जागरूकता ही है इसके अलावा सबसे पहली बात अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार रहें अर्थात् एक से अधिक व्यक्ति से यौन सबंध ना रखे |

सबंध बनाते वक्त कंडोम का प्रयोग करें | यदि आप HIV से संक्रमित हैं तो अपने जीवनसाथी से यह बात जरूर सांझा करेंं व HIV के संक्रमण की स्थिति में रक्त दान ना करें हमेशा रक्तदान लेने से पहले रक्त का  HIV टेस्ट जरूर करायेें यदि आपको HIV के संक्रमण होंने का जरा सा भी संदेह होता है तो आप HIV / AIDS का परीक्षण जरूर करायें |         

पूरी दुनिया में 1दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है इस दिन सभी लोग एकजुट होकर HIV /AIDS के खिलाफ होकर लोगों में जागरूकता फैलाते हैं 1988 में पूरी दुनिया ने एकजुटता के लिये 1दिसंबर को ही चुना था तो आइए हम भी विश्व एड्स दिवस पर अपनी एकजुटता को दिखाकर एड्स के खिलाफ लोगो को जागरूक करते हैं | देखा जाये तो WHO की रिपोर्ट के हिसाब से एड्स का पहला केस 1981 में सामने आया था अब तक 39 मिलियन लोग इसका शिकार हो चुके हैं |

इस बीमारी की सबसे बड़ी दवा लोगो में जागरूकता और सावधानी ही है | एड्स से ग्रसित लोगों के साथ कोई भेदभाव न रखें उनके साथ प्यार से पेश आयें इसकी सबसे बड़ी वैक्सीन सही जानकारी ही है जितना हो सके शिक्षा के माध्यम से भी लोगो को जागरूक किया जा सकता है सही जानकारी का होना अतिआवश्यक होता है तभी हमारा विश्व एक न एक दिन एड्स मुक्त हो पायेगा |   

स्पेशल नोट :- HIV/AIDS संक्रमण किसी भी उम्र के लोगो को हो सकता है | रेड रिबन HIV पॉजिटिव लोगों के साथ एकजुटता और एड्स के साथ जी रहे लोगों के लिये वैश्विक प्रतीक है |                                                       

रिंकी पांडेय 

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