नायिका अनुपमा (रूपाली गांगुली)

नायिका अनुपमा (रूपाली गांगुली)

यद्यपि छोटे से जादू के पिटारे मोबाइल में समंदर की तरह कितना कुछ समाया हुआ है, फिर भी सोशल मीडिया के इस दौर में भी टेलीविजन ने अपना आकर्षण नहीं खोया है। मेरी पीढ़ी टेलीविजन से उस समय से प्रभावित है जब घर की छत पर लगा ऊँचा सा एंटीना एक गौरव का प्रतीक समझा जाता था कि उस घर में टेलीविजन लगा है। मोहल्ले में कुछ घरों में ही टेलीविजन हुआ करता था और किसी खास कार्यक्रम के समय पड़ोसी  भी वहाँ उपस्थित होकर आनंद उठाते थे।

टेलीविजन के रूप स्वरूप में भी निरंतर बदलाव हुआ। आज स्मार्ट टीवी का दौर है।  इसने दूरदर्शन के सायंँकालीन कुछ घंटे के कार्यक्रम से प्रारम्भ करके डीटीएच तक का सफर निरंतर तय किया है परंतु इसका आकर्षण अभी भी बरकरार है। आज टीवी में अलग-अलग चैनल पर बहुत सारे कार्यक्रम उपलब्ध हैं।

मेरा मनपसंद कार्यक्रम अनुपमा है। नायिका प्रधान कार्यक्रम अनुपमा में उसके चरित्र को बहुत प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया गया है। परिवार के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित अनुपमा के लिए उसका परिवार ही सब कुछ है। वह एक कर्तव्य परायण बहू, एक ममतामयी माँ और पति भक्त पत्नी है। कम पढ़ी-लिखी अनुपमा को परिवार में उतना सम्मान नहीं मिलता जितने की वह अधिकारिणी है।

हर गलती के लिए पति और सास उसे दोष देते हैं, और वह यह मान भी लेती है कि दोष उसी का है, परंतु जब पति का धोखा उसके सामने खुलता है तो पहले तो वह बुरी तरह टूट जाती है, फिर अपने कुचले हुए आत्मसम्मान को पुनः इकट्ठा करके स्वयं को जोड़ने का प्रयास करती है। पति से नाता समाप्त करके भी वह घर नहीं छोड़ती क्योंकि उसका मानना है कि उससे जुड़े अन्य रिश्तों का कोई दोष नहीं है। वह अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास कर रही है। उसका आत्मसम्मान ही अब सबसे महत्वपूर्ण है।

अनुपमा के किरदार में अलग-अलग रूपों  की झलक देखने को मिलती है। कभी डरी सहमी मध्यमवर्गीय बहू,  कभी दृढ़ निश्चय स्त्री, जिसे अपने लिए भी जीना है। कम पढ़ी लिखी होने के बाद भी सोच से बहुत आधुनिक है और संस्कारों से भी समझौता नहीं करती। अतः मुझे यह धारावाहिक और इसकी नायिका अनुपमा (रूपाली गांगुली) बहुत पसंद है और यह मेरा पसंदीदा कार्यक्रम है और मैं इसके साथ दिल से जुड़ा हुआ अनुभव करती हूँ।

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