ये कैसी आपदा हम पर है आई।

ये कैसी आपदा हम पर है आई।

कैसी ये मायूसी कैसी ये उदासी 

हर ओर है छाई 

बेबस हो रहे हैं हम प्रकृति के सामने 

बस यही बात अब तक समझ में है आई 

मन परेशान और हैरान हैं

कल क्या होगा इससे अंजान है।

मन विचलित हो रहा है 

ऐसी आपदा देखकर

चारों तरफ़ मचा है कोहराम

अपनों की जान बचाने की खातिर

इधर उधर भटक रहा है इंसान

अपने अपनों के लिए जूझ रहे हैं।

इंसानियत और दिलों के रिश्ते

आपस में छूट रहे हैं।

ये कैसी आपदा हम इंसानों पर है आई



हे प्रभु ये कैसा दिन दिखा रहे है

जहां हर तरफ़ इंसान बिलख बिलख कर रो रहा हैं

टूट रहे हैं धागे सारे ,छूट रहे हैं बंधन सारे

कोई पिता खो रहा है तो कोई मां

कोई अपने बच्चों को तो कोई पति को 

किसी का घर बार उजड़ रहा है


ह प्रभु हे तारणहार हमें इस संकट से बाहर निकालो

इस विकट परिस्थिति से लड़ने की हमें शक्ति दो प्रभु


सब अच्छा होगा ऐसी सकारात्मकता का सब में प्रवाह करो

उनकी संयम और दुख का इम्तिहान और ना लो।

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