ये कैसा इश्क?

ये कैसा इश्क?

वैलेंटाइन डे दो दिलों के बीच बेइन्तहाँ प्यार का प्रतीक माना जाता है बशर्ते इश्क की आग जब दोनों तरफ़ बराबर लगी हो। उस दिन लड़के-लड़कियाँ अपने प्यार का इज़हार एक दूसरे से करते है। अगर दोनों को एक दूसरे का साथ मंज़ूर है तो दोनों ताउम्र के लिए प्यारे से बंधन में बंध जाते है। पर अगर कोई लड़का किसी लड़की को प्रपोज़ करता है, और लड़की को उसका प्रस्ताव मंज़ूर नहीं होता तब लड़की इन्कार करने के लिए स्वतंत्र होती है। जरूरी नहीं उसे भी लड़के से प्यार हो। ऐसी परिस्थिति में लड़कों को इन्कार के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए, ना कि लड़की के ना कहने पर एसिड अटेक या जान से मार देना चाहिए।

कल वैलेन्टाइन दिवस की पूर्व संध्या पर प्यार के नाम पर गुजरात के सूरत शहर से हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एकतरफा प्यार में पागल प्रेमी ने सरेआम एक लड़की की हत्या कर दी। साथ ही उसने लड़की के पिता और भाई पर भी हमला किया। बाद में इस युवक ने जहर खा कर आत्महत्या करने की कोशिश की।

लड़की को मारने से पहले प्रेमिका के भाई और पिता पर हमला किया। इसके बाद लड़की के गले पर चाकू रखकर प्रेमिका को घर से बाहर ले गया। और फिर सबके सामने गला काट दिया। आसपास के लोगों ने पागल प्रेमी को लड़की को छोड़ने की लगातार गुजारिश की, लेकिन आशिक के सर पर ऐसा खून सवार था कि उसने किसी की नहीं मानी और उसने सबके सामने लड़की का गला काट दिया।

कहा जाता है की कालेज के वक्त से वह लड़का उस लड़की से प्यार करता था, पर लड़की के मन में ऐसा कोई भाव नहीं था। बहुत समय से वो लड़का उस लड़की का पीछा कर रहा था। उस लड़की के घर वालों को भी पता था। घर वालों ने शायद एक दो बार लड़के को समझाया भी था। उस वक तो लड़का मान भी गया, पर वापस वही सिलसिला शुरू हुआ तब लड़की के घर वालों ने बदनामी के डर से चुप रहना सही समझा और लड़के को इग्नोर किया, और इसी कारण लड़के को छूट मिल गई। आख़िर क्यूँ ऐसे मामलों में लड़की के घरवाले चुप्पी साध लेते है। और इसी कमज़ोरी की वजह से बात इस हद तक पहुँच जाती है। जब ऐसी नोबत आए तब कानून का सहारा लेकर मामला सुलझाने चाहिए, या लड़के के घरवालों को आगाह करना चाहिए।

क्या इसे प्यार कहेंगे? प्यार तो अपने साथी की खुशी चाहता है। प्यार सामने वाली व्यक्ति के दु:ख का, या मौत का कारण कैसे बन सकता है। अगर वो मेरी नहीं बन सकती तो किसी ओर की भी नहीं होने दूँगा, ये वाली मानसिकता फ़िल्मों तक सिमित रहे तो ज़्यादा अच्छा है। रावण और दुर्योधन नहीं राम और कृष्ण बनकर दिखाओ। सच्चा प्रेमी वो है जो प्यार में छीनना नहीं देना जानता हो। लड़की अगर एक बार \"ना\" कहे तो "ना" ही समझो जबरदस्ती से हासिल करने में कोई महानता नहीं, अपने माँ बाप के संस्कारों को लज्जित कर रहे हो। इस मामले में लड़का लड़की की ना सुनने के लिए तैयार ही नहीं था, अजीब जबरदस्ती हुई। शायद ऐसे लड़कों पर \"तड़प\" या \"कबीर सिंह\" फ़िल्म के हीरो वाला जुनून सवार होता होगा। आज हर अभिभावक अपनी बेटियों को दुनिया भर की बातें सीखाने में और संस्कार देने में माहिर होते है, ज़रा अपने लाडलों को भी दो बातें सीखानी चाहिए की हर लड़की, हर औरत की इज्जत करें। प्यार करना इज़हार करना गुनाह नहीं, पर अगर लड़की ना कहे तब उस बात को अहं का मुद्दा न बनाते ना का स्वीकार करना भी आना चाहिए।

लड़की कोई बाइक या चीज़ नहीं जिसको पाने की ज़िद्द करके उसके इमोशन खरीदे जाए। प्यार पाना है तो काबिल बनकर दिखाओ आपकी शख़्सीयत से प्रभावित होते लड़की खुद आपको प्रपोज़ करें ऐसा व्यक्तित्व उभारो। आज हर माता-पिता का फ़र्ज़ बनता है की अपने बेटों की मानसिकता और गतिविधियों पर नज़र रखें, उनसे बातचीत करें। अगर लगे की बेटा कोई गलत काम कर रहा है तो प्यार से समझाए, प्यार से न मानें तब सख़्ती से काम लें। बच्चों की भूल पर पर्दा डालकर आप बच्चे के भविष्य पर धूल डाल रहे है।

इस मामले में कोर्ट लड़के को सज़ा सुनाएगी, लड़का जेल जाएगा पर उस लड़की का क्या जिसे ज़िंदगी से हाथ धोना पड़ा। ऐसे लड़कों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए ताकि समाज में एक उदाहरण बैठे। वैलेन्टाइन डे के नाम पर आजकल की पीढ़ी ने प्यार, इश्क, मोहब्बत के मायने ही बदल दिए है। ऐसे वहशी और दरिंदे लड़कों की हरकतें जुनून का रुप ले उसके पहले लड़कियों के माँ-बाप को पुलिस की मदद लेकर लड़के को सबक सिखाना चाहिए ताकि लड़का आगे कोई ऐसी हरकत न कर पाए जिससे लड़की को जान से हाथ धोने पड़े।

भावना ठाकर \"भावु\" (बेंगलोर, कर्नाटक)

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