यादगार छठ व्रत का पारण.

यादगार छठ व्रत का पारण.

बार आप छठ व्रत अपने घर यानी यहाँ से करना बहुत अच्छा "माँ इसलगेगा मैं कहीं और नहीं जाना चाहती आपके साथ छठ पूजा में "|गौरी की बेटी प्रीति उससे मनुहार कर रही थी


महापर्व छठ व्रत अपने घर पर मनाने के लिए एक पल के लिए गौरी बेटी की बातों पर विचार की और उससे कही...."हाँ बेटा इसबार कहीं नहीं जाना छठ अपने घर करूंगी |"गौरी बेटी को प्यार से छठ की महिमा समझाई छठ माता लोगों को समृद्धि, धन, बच्चे, सभी कुछ का आशीर्वाद देती है |

 वह हमारी सभी इच्छाओं को पूरा करती है और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती है | लोगों का बहुत दृढ़ विश्वास है, इसीलिए हर साल वे इस अवसर को बहुत ईमानदारी से मनाते हैं | हमारे जीवन को आनंद और खुशी से भर देती है जो हम सभी को पसंद है | उनका दिया सबकुछ है मेरे पास इसलिए व्रत पूजा अपने घर से कर सूर्य और छठी मईया का शुक्रिया करना उचित रहेगा |छठ पूजा संयम और तपस्या का पाठ पढ़ाती है। \"उदित सूर्य\" एक नए सवेरा का मानक है तो \"अस्त होता हुआ सूर्य\" केवल विश्राम का प्रतीक है |


ये व्रत इंसान को यह सिखाता है कि अगर लक्ष्य निश्चित है और उसके लिए मेहनत लगातार किया जाए तो इंसान को हर हालत में सफलता मिलती है | जीवन किसी के लिए नहीं रूकता, जिस तरह से सूरज अस्त होने के बाद दूसरे दिन पुन: ऊर्जा के साथ निकलता है और संसार को रोशनी प्रदान करता है उसी तरह से इंसान को भी हर दिन कुछ नया करने बारे में सोचना चाहिए |अपने घर के छत से डूबते और उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के बाद छठ पूजा समाप्त कर इसके साथ ही गौरी का भी उपवास के 36 घंटे का निर्जला व्रत भी खत्म हो गया


|महापर्व छठ बहुत अच्छे से ख़ुशी पूर्वक संपन्न करने के बाद गौरी ठेकुआ प्रसाद पहले बच्चे और पति को दी और खुद भी खाई | उसके बाद पारण बनाने रसोई में आई | वैसे तो व्रती का पारण कोई और घर में पहले से बनाकर रखा रहता है ज़ब व्रती छठ घाट से आती हैं तो उनका पैर गरम पानी से धोकर तुरंत खाना लगा दिया जाता है लेकिन इस बार पारण गौरी को खुद बनाना पड़ेगा क्योंकि यहाँ किसी को कुछ बनाना नहीं आता और छत पर व्रत करने से बहुत ज्यादा थकान नहीं था | व्रत में अत्यधिक काम करने से सुबह - सुबह रसोई में जाते समय गौरी को चक्कर आया और वह गिर गई उसके गिरने की आवाज सुनते ही सारे भाग कर आ गए देखा तो पानी में पैर फिसल गया था लेकिन चोट अधिक नहीं लगी थी | पतिदेव और बच्चों ने उठाया और पानी पिलाया , गौरी की जान में जान आयी की कोई हड्डी नहीं टूटी वरना सबका काम रूक जाता ...


धीरे से उठ कर उसने किचन का रूख किया सबका और ख़ुद खाने के लिए खाना बनाने लिए तभी उसकी बेटी प्रीती आयी और बोली..."मम्मी तुम आराम करो मै आज पापा के साथ मिलकर कुछ बनाऊंगी!"अपनी बिटिया पे बड़ा प्यार आया.….14 साल की प्रीति आज फटाफट काम कर रही थी | छठ के सुबह अर्घ्य होने से बिहार में ऑफिस, स्कूल सब बंद रहता है | बाई भी आ गई प्रीति बाई से भी काम कराया भाई वाह आज तो बड़ा मन खुश है! गौरी का पूरा परिवार उसके ऊपर निर्भर करता था किसी को खाना बनाना, चाय बनाना क्या गैस चूल्हा जलाना तक नहीं आता है लेकिन आज माहौल बिल्कुल अलग दिख रहा है |


दोनों भाई बहन से कम नहीं निकले बड़ा हर्ष मेरे लिए पीने का पानी कुछ ज्यादा ही गरम कर दिया तो छोटा भाई प्रीत भी उसने एलान किया.. "पापा आज आप रसोई की रानी बनोगे! और मम्मा..... आप...पापा..मतलब पापा घर के सारे काम करोगे और मम्मी आराम...!" क्या बात है सुख ही सुख | पापा और बच्चों ने मिलकर किचन में धमाल करने का प्रोग्राम बना लिया.... पतिदेेेव् ने गौरी को डाँट कर निकाल दिया....हाय अब क्या होगा किचन में...आराम से आराम भी नहीं कर सकती आखिर उसके एरिया में शैतानो ने डेरा डाल लिया था |किचन से तरह तरह की आवाजें आ रही थी...मिलजुल कर आख़िरकार व्रती का पारण बन गया और महापर्व की व्रती गौरी को व्रत खोलने के लिए बुलाया गया... ये क्या प्रीति इतना अच्छा टेबल सजाती है..पता ही नहीं था नया डिनर सेट निकाल लिया पूछा नहीं अब इसे खुद से साफ करना पड़ेगा ..आज खाना सच में बहुत स्वादिष्ट लगा वो थोड़ी-सी चिपचिपी और जली चावल, बिना तड़के की दाल....तड़का लगाना भूलगए, कम नमक की सब्जी , थोड़े जले पापड़ ,प्रीत के हाथ से कटा हुआ टेड़ा मेड़ा सलाद | सबने बिना किसी शिकायत के हँसी ख़ुशी खाना खाया... डिनर सेट पतिदेव ने ही साफ किया.. ..सोचा न था..नो टेंशन |गौरी का मन भर आया सबका प्यार देख कर....पता था किचन की हालत अच्छी नहीं है..सब जगह आटे के हाथ है,ऑइल प्लेटफार्म में फैला है,जमीन में पानी फैला है...तो क्या...आज जो खाना बना वो तो फाइव स्टार होटल में भी न मिले....कल वो सब साफ़ कर लेगी....प्रीत ने हिलाया "मम्मी क्या सोच रही हो खाने के बाद अब कुछ मीठा हो जाए डेरीमिल्क चॉकलेट से जल्दी से मुँह खोलो"...प्रीत के नन्हे हाथों से चॉकलेट खाते खाते गौरी सोच रही थी कभी- कभी चक्कर आने पर फिसल जाना चाहिए....आखिर इतना प्यार जो मिलता है..…इस बार महापर्व के समाप्ति पर अपने परिवार से ढेरो प्यार को पाकर गौरी ख़ुशी से अभिभूत हो रही थी |आपका क्या ख्याल है अगर कभी-कभी पतिदेव को रसोई का राजा बना कर .....



बताइएगा जरूर..☺️


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धन्यवाद ?

आपकी सखी नीतू श्रीवास्तव.... ✍️

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