ये आँचल मुझे जंचता है !

ये आँचल मुझे जंचता है !

कितने भी तू कर ले सितम हंस हंस के सहेंगे हम ! ये गाना एक औरत के जीवन की सच्चाई दर्शाता है। सदी चाहे पन्द्रवीं रही हो या इक्कीसंवी , ऐसे क्यों चलती हो , ऐसे क्यों हंसती हो ? पहले सुनाया सर पे पल्लू क्यों नहीं रखती हो और अब कहते हैं ये घुँगटा क्यों करती हो ?ज़माने के सितम का दस्तूर कुछ यूँ हो चला है ” शायद मेरे सांस की खबर भी ली जाएगी !

बरबस कुछ ऐसा ही हुआ टेलीविज़न की जानी मानी अदाकारा “मोहिना कुमारी सिंह के साथ। बता दें मोहिना स्टार प्लस पर आने वाले सुपर डुपर सीरियल ” ये रिश्ता क्या कहलाता है ” में काफी सालों से काम कर रहीं हैं। मोहिना ने अक्टूबर २०१९ में सुयश रावत से शादी की ,और उनकी शादी हुई थी हरिद्वार में। जो की एक थीम वेडिंग थी ,और चूँकि दोनों ही परिवार राजपूत घराने से हैं , तो पूरे रीति रिवाज़ के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ। हाल ही में मोहिना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी शादी की कुछ तस्वीरें शेयर की।

इन तस्वीरों में मोहिना लाल सुर्ख रंग की पारंपरिक परिधान में नज़र आयी ,जिसे डिज़ाइन किया गया मशहूर सब्यसाची ने। जिसमे उन्होंने पारंपरिक राजपूत महिलाओं की तरह घूँघट लिया हुआ था। इंस्टाग्राम पर एक तरफ जहाँ उनके फैंस ने उन्हें प्यार भरे कमेंट्स और heart इमोजी से तारीफ के पुल बांधे , वही दूसरी ओर कुछ ट्रोलर्स ने उनके घूँघट करने पर सवाल उठा ” अनपढ़ ” जैसे वाहियात शब्दों से नवाज़ा।

मोहिना ऐसे में चुप कहाँ रहने वाली थी , उन्होंने बखूभी ट्रोलर्स को जवाब दे कर उनको चुप करा दिया। उन्होंने लिखा “

Even Christians have a veil when they marry…and so do Muslims… I guess they are all uneducated too,” she wrote. “It’s an age old Rajput tradition which Rajput women follow when they get married.”

” Christian , मुस्लिम सभी वेडिंग या निकाह के वक़्त अपना चेहरा ढकते है , इस हिसाब से वे सब भी अनपढ़ हैं। ” वे आगे लिखती हैं ” विवाह के समय घूँघट रखना यह एक बहुत पुराना रिवाज़ हैं , जो महिलाएं ख़ुशी ख़ुशी निभाती हैं।

इन सब के बीच एक बात तो साफ़ दिखाई पड़ती है ” फेमिनिज्म और मॉडर्निटी की आड़ में ,काफी हद्द तक हम अपने कल्चर और ट्रेडिशन से जुडी काफी अच्छी रीतियों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं। रही बात घूंघट करने और न करने की ,तो ये एक निजी और पारिवारिक मामला होता है , अगर महिलाएं इसमें सहज महसूस करती हैं , तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

आपकी क्या राय है ” क्या हर रीति और रिवाज़ को बेवजह नकारा जाना चाहिए ?

Vaani Bhardwaj

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