YES, I AM Pampered

YES, I AM Pampered

आजकल अक्सर बहुत निराशावादी स्टोरीज पढ़ने को मिलती हैं , कईं बार तो लगता है की क्या लाइफ में कुछ भी अच्छा नहीं है ! बस यही सोच कर मन किया की कुछ पॉजिटिव लिखा जाये !

तो बात कुछ यूँ थी की एक दिन हमने पतिदेव से कहा की हम तो अपना व्हाट्सअप स्टेटस “YES I AM Pampered ” ही रखेंगे और पतिदेव ने कहा “अरे रहने दो, कंही नज़र न लग जाये “ हा हाँ  !

तो भाई Pampered कैसे हुए हम ये बताते हैं !

भाई बहनो में सबसे छोटा होना भी फायदे का सौदा रहता है , न सिर्फ उन सबका प्यार मिलता है बल्कि पापा की लाड़ली होने का मज़ा भी अलग ही रहता है। मम्मी से भी यूँ तो काफी लगाव है मुझे पर पता नहीं क्यों पापा सबसे अलग लगते थे ! अब तो पापा नहीं रहे लेकिन उनकी यादें है और सच कहूं तो मेरे पति और दोनों बेटियां मेरी सब खुशियों का ध्यान रखते हैं ! खुद मे और अपनी छोटी बेटी मे मुझे मेरा और पापा का जीवन जैसे फिर से जीने को मिल जाता है ! जितने लाड और प्यार मैंने पापा से किये मेरी बेटी भी व्ही सब करती है मेरे साथ !

हर लड़की का सपना होता है की उसका जीवन साथी उसके पापा जैसा ही हो और मै बात कर रही हूँ मेरे जीवन साथी की , जी हाँ-विवाह से पहले जब कुंडली मिलाई गई तो पुरे 33 गुण ही मिल गए , फिर क्या देखना था कर दी घर वालों ने शादी की तैयारी ! सब के अपने लॉजिक थे की कैसे ये मैच बेस्ट रहेगा ! और मम्मी, बहनों और भाभी की सीख और संस्कारों के साथ 16  साल पहले हो गया सफर शुरू हमारे वैवाहिक जीवन का !

हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों को ज्यादातर जितना सा काम आता होता है बस वो सब मुझे भी आता था ! मन में शंकाएं लिए एक नए माहौल में एडजस्ट होने की कोशिश होने लगी  ! भाभी से खाना बनाने के जो टिप्स लेकर आई थी वो अब ससुराल मे मम्मी(MIL) के निरिक्षण में आजमाए जाने लगे और जंहा कुछ ना समझ में आता स्पष्ट पूछ लेती मम्मी ये कैसे बनेगा  ! फिर व्ही हुआ, जी हाँ- मुझे सासु माँ और ससुर के रूप में मम्मी पापा वंहा भी मिल गए और अब बन गई मै लाड़ली बहु ! एक छोटी और अच्छी वाली ननद, कभी मै तो कभी वो गलती कर देती और हम दोनों मे सांमजस्य बिठाने का काम करती हमारी मम्मी(MIL)! सबसे मुझे मेरी सोच से ज्यादा प्यार और सम्मान मुझे मिला !

लेकिन अब हम ठहरे ट्रांस्फ़ेरेबल जॉब वाले , तो पति देव ने 16 साल में 5 शहरों में घुमा दिया , आधी जिंदगी तो पैकिंग, अनपैकींग, अड़जस्टमेंट्स में चली गई और क्यूंकि MBA हमने घर में बैठने को नहीं किया था तो हर शहर में नए माहौल में नौकरी ढूँढना और सेट होना एक अलग रिस्पांसिबिलिटी थी ! और यंहा भी हम अपनी जगह बना ही लेते ! मै अब अपने पति और बच्चों के साथ मुंबई मे रहती हूँ , और हम दोनों के परिवार हज़ारों मील दूर चंडीगढ़ मे हैं ! मम्मी पापा (इन-लॉज़ ) 6 महीने हमारे साथ मुंबई मे तो 6 महीने चंडीगढ़ मे बिताते हैं ! पर सच मानिये जो 6 महीने उनके बिना निकलते हैं उसमे हम सब बस उनका इंतज़ार ही करते हैं !

हाँ तो अब बात रह गई पति देव की ! उम्र मे हमारी बस थोड़ा सा ही फर्क, और अपने मम्मी पापा के बहुत ही ज्यादा लाडले वाले मेरे पति , जिनको पानी का गिलास भी लेना आता न हो, तो देखें कैसे चल रही है अपनी गाड़ी !

हम दोनों एक से हैं गुस्सा नहीं होते तो महीने निकल जाते हैं और अगर किसी बात पर शुरू हो गए तो फिर दोनों ही गुस्सा हो जाते हैं, और साइलेंस जोन में चले जाते हैं ! फिर जिसका मूड पहले ठीक हो जाये वो शुरुआत कर देता है और ये व्हाट्सअप है न, बस यही हमारी सुलह करवा देता है ! लड़ाई के नाम पर अजीब अजीब से एमोजिस भेज देते हैं एक दूसरे को और मन की भड़ास निकल जाती है !

एक दूसरे की वर्किंग लाइफ में इंटरफेर तो बिलकुल नहीं करते पर हर डिसिशन डिसकस करके ही होता है ! हर रोज़ तो मै शाही पकवान नहीं बना पाती लेकिन उनकी पसंद का अच्छा खाना बनाने की पूरी कोशिश रहती है और जिस दिन न बने तो पतिदेव खिचड़ी का प्रस्ताव रख देते हैं जो सर्व सम्मति से मंजूर हो जाता है ! कितना भी हम दोनों नाराज़ हो जाएँ लेकिन खाना तो साथ में बैठकर ही खाएंगे !

मेरे सूंदर बनकर रहने का शौंक पति देव को इतना है की कभी कभी तो मै नाराज़ ही हो जाती हूँ ! वीकेंड पर यूँ ही हम दोनों बेमकसद कुछ देर के लिए अपने स्कूटर पर चक्कर लगाते रहते हैं और यही हमारा क्वालिटी टाइम बन जाता है ! और मुझे पता है की मेरे पतिदेव अपने मम्मी पापा के लाडले और एकलौते सुपुत्र  हैं और उन्हें कभी दुखी नहीं देख सकते तो बस उनकी खुशियों का ध्यान मै रखती हूँ और मेरी खुशियों का मेरे पतिदेव !

कभी अपने पापा के बारे में सोचकर मै यूँ ही उदास हो जाती हूँ पर मेरा परिवार मुझे कुछ देर के लिए उदास भी होने देता है ! फिर दो प्यारी सी बेटियां मुझे हरदम जीने की नई उमंग देती रहती हैं ! बड़ी बेटी टीनएज में आकर खुद को मुझसे जयादा एक्सपर्ट समझती है , मेकअप  के नए नए तरीके बताती है , मेडिसिन न लेने पर मेरी मम्मी बनकर डाँट भी लगाती है और छोटे वाली तो जैसे मुझे फिर से बच्चा ही बना देती है !

कभी अपने पापा की याद आये तो हमारे पापा (FIL ) दिख जाते हैं, अब मुझे दोनों मे कोई फर्क लगता ही नहीं ! मम्मी (MIL ) की छोटी छोटी खुशियों का मै ध्यान रख लेती हूँ और वो मुझे हर छोटी बड़ी बात में इन्वॉल्व करती हैं ! मुझे तो ऐसे लगता है की ये जो बड़े लोग होते हैं इनको थोड़ी रेस्पेक्ट और अटेंशन ही अगर अच्छे से दे दी जाये तो वो आपको भरपूर प्यार देते हैं ! एक ख़ास बात जो मेरा अनुभव कहता है अपने घर की समस्याएं बाहर डिसकस करने से बढ़ती है, किसी से राय लेने से पहले अपने हालत को समझें।वर्क और होम लाइफ के बीच मे अपने आप बैलेंसिंग हो जाती है जब आपका मन खुश हो !

ऐसा नहीं है दोस्तों की मेरे जीवन में कुछ कमियां नहीं होंगी लेकिन अच्छा भी तो बहुत कुछ है तो क्यों न अच्छी चीजों को देखा जाये ! नाराज़ तो कभी कभी हम अपनी मम्मी से भी होते है तो सासु माँ से नाराज़गी का बवाल क्यों बन जाता है ! बहनों से भी तो कभी नाराज़गी हो जाती है तो ननद और भाभियों के लिए ही क्यों मन मे विरोध रखें ! रिश्तों मे ऊंच नीच हो जाती है पर रूठना मनाना चलता रहना चाहिए ! सुखी जीवन का मंतर जो मुझे और मेरे पतिदेव को समझ आता है वो बस इतना ही है की एक दूसरे को और एक दूसरे के रिश्तों को इज्जत और सम्मान दिया जाये, जब एक बोलता हो तो दूसरा चुप हो जाये , कभी एक झुके तो कभी दूसरा मना ले ! दोस्तों जीवन रुपी गाड़ी के पति और पत्नी दो पहिये होते हैं कंही एक थोड़ा ज्यादा वेट संभाल ले कंही पर दूसरा , पर आख़िरकार हम दोनों को ही संभालना है !

कुल मिला कर पापा ने जो जिंदगी मुझे दिखाई थी बस व्ही चल रही है। भगवान् का आशीर्वाद बना रहे और  सबको ऐसे ही परिवार और जीवनसाथी मिलते रहें !

मन के कुछ विचार बस साझा किये हैं, पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद् , आपके कमैंट्स का इंतज़ार रहेगा !

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