यू ट्यूब है ना

यू ट्यूब है ना

शिखा और अभिनव की शादी दोनों परिवारों की रजामंदी से देखसुन कर हुई थी। अनूप तीन भाईयों में बीच का था और शिखा घर में सबसे छोटी बेटी थी। जिसने पढ़ने लिखने के अलावा सिर्फ मस्ती करना ही सीखा था।

ससुराल में शिखा की जेठानी जया भी थी। दोनों मिलकर सब कुछ कर लेतीं थीं। शिखा तो घर के कामों में बहुत एक्सपर्ट नहीं थी। पर जया के साथ छोटे मोटे काम जैसे प्याज काटना लहसुन निकालना और सब्जी काट देना करवा देती थी। बाकी की रसोई जया बनाती थी। महिने भर बाद तक तो ससुराल में शिखा को सिर्फ सुबह का नाश्ता बनाना होता था। वह कभी दलिया कभी हलवा और कभी आलू के पराठे और कभी पास्ता बना देती थी। मायके में भी उसने कभी कभार ही बनाया था वो भी सिर्फ सुबह या शाम का नाश्ता।

यहां दोपहर का भोजन उसकी जेठानी जया बनाती थी। सास के निर्देश पर जया शिखा से आटा गूंथने, रोटी बनाने का काम भी लेने लगी थी । पर लंच वही बनाती थी। जया समझ चुकी थी की शिखा खाना बनाने में कच्ची है।
महिना बीत रहा था पर शिखा ने एक भी दिन पूरा खाना नहीं बनाया था।पर एक दिन शिखा की सास ने जया को बहाने से सारा किचन का काम शिखा से कराने को कहा। क्योंकि अब जया के साथ शिखा की सास भी सोचने लगी कि कहीं शिखा कामचोर तो नहीं है। अभी वह कोई जाब नहीं भी नहीं करती थी कि उसकी पढाई लिखाई की काबिलियत का पता चले ।और अगर वह घर के काम में भी जीरो निकली तो सब कुछ सिरे से सिखाना पड़ेगा। ये सब सोचकर सास और जेठानी ने शिखा की परीक्षा करने की योजना बनाई।

एक दिन जया ने शिखा से कहा कि आज उसको नहाने और कपड़े धुलने में ज्यादा समय लग जाएगा । क्योंकि एक हफ्ते से बच्चों के गंदे कपड़ों का ढेर लग गया है। तो आज दोपहर की रसोई भी तुमको ही बनानी है।
और जया ने शिखा से खाने में तोरी की सब्जी , कढ़ी, चावल और रोटी बनाने को कहा । वो शिखा कै बेसन का डिब्बा दिखाकर, और किचन में एक बार फिर से मसाले वगैरह सब कुछ दिखाकर अपने कमरे में घुस गई। उधर सास को इशारा कर दिया तो वह भी किसी काम का बहाना बनाकर बाहर निकल गयी। इधर किचन में शिखा अकेली पहले तो उसनेसोचा ,कि जया थोड़ी देर में आ जाएंगी, ये सोचकर वो सब्जी काटने लगी। पर जब ज्यादा देर हो गई तो उसने फटाफट यू ट्यूब में तोरी की सब्जी बनाने की विधी चलाकर के सब्जी बना दी। और कढीभी उसी में देखकर बनाने लगी। हालांकि शिखा ने कढी़ कभी नहीं बनाया था। तो वह मन ही मन उसे थोड़ा लग रहा था कि कहीं कढी खराब बन गयी तो क्या होगा।

फिर भी जया को रसोई में नहीं आते देख उसने बेसन फेटा और विडियो के अंदाज में ही बड़ियां तलने लगी। निर्देशानुसार ही तड़के के लिए शिखा ने हींग,मेथी,जीरा, धनिया, अजवाइ और साबुत लाल मिर्च ले लिया। थोड़ा जीरा धनिया अलग से लेकर भूना और चकले पर ही रगड़ कर पीस लिया कढी में डालने के लिए। तोरी की सब्जी और चावल बन गये। बड़िया भी तैयार हो गयीं पर शिखा की जेठानी जी का पता नहीं था। शिखा बाथरूम के दरवाजे तक भी जाकर देख आई कि वो अंदर ही हैं या बाहर आ गईं।

क्योंकि शिखा चाह रही थी कढ़ी के लिए बेसन का कितना घोल बनाना है ये जया बता दे । क्योंकि उनका अंदाज सही है, उनसे पूछकर बेसन का घोल बनाने की सोच भी बेकार हुई। क्योंकि पर उस समय जेठानी क्या शिखा की क्या सासु मां का भी कहीं अता पता नहीं था। जैसे दोनों मिली भगत करके नदारद हो गईं थी कि आज नयी बहू की परीक्षा करनी है, कि इसे कुछ परंपरागत चीजें बनानी आती भी हैं ।या सिर्फ अंग्रेजी स्कूल गयी है।
शिखा के तो ये अंदाजा लगते ही कान खड़े हो गए। क्योंकि वह एक बात को मानती थी कि “दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो तुम मैं कर सकती हूं। या कोई भी चीज नामुमकिन नहीं है ”

बस शिखा आत्म विश्वास से लग गयी। आधे किलो बेसन में उसने लगभग डेढ़ किलो दही डालकर घोल बना लिया। रसोई की कड़ाही छोटी लगी तो शिखा ने सामने टांड़ पर रखी चारकिलो की बड़ी कड़ाही स्टूल लगाकर उतार ली और चूल्हे पर चढा़ दी ।और बेहिचक उसने पूरी कड़ाही भर के तीखी और मसाले दार कढी़ बनाकर एक तरफ कर दिया क्योंकि कढ़ी पर साथ में ही एक कहावत भी पढ़ ली कि बासी और भाती है। बस अब ज्यादा बन जाने का भी डर खत्म। और रोटियां सेकनें लगी।

सारी रोटियां बनाने के बाद भी जेठानी और सास को न आते देख, उसने कुछ नया भी करने का सोचा। फ्रीज में पड़े रात के चावलों से क्या क्या बन सकता है कि सब रेसिपी देख डाली और आसान सी मीठी भात बनाने की रेसिपी चुन कर फालो करती गयी। और एक मीठा आइटम भी बना लिया।

केसर और इलाइची की खुशबू सुंघकर जया किचन में आई तो हैरान रह गई। इतना सब कुछ शिखा ने कैसे बना लिया। सास और जेठानी की बोलती बंद थी। सास भी हैरान तो हुई पर नयी बहू पढाई के साथ खाना बनाने में भी उस्ताद है ये जानकर खूब प्रसन्न हुईं।बाद में जया ने कहा कि “अरे मैं तो सोच रही थी कि तुम इतना सारा खाना बना नहीं पाओगी। कोई परेशानी तो नहीं हुई।”शिखा मुस्कुराते हुए बोली “कोई परेशानी नहीं हुई दीदी”
और मन ही मन कहा कि ” मैं माडर्न बहू हूं गैजेट्स यूज करना अच्छे से जानती हूं”।

आपको ये काल्पनिक कहानी कैसी लगी। क्या आपके जीवन में भी ऐसी घड़ी आई है जब आपने विडियो देखकर कुछ ट्राई किया और सक्सेज हुए।क्योंकि नकल में भी अकल की जरूरत होती है। अपने विचार जरूर बताएं।

आपकी दोस्त
स्नेहलता उपाध्याय

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